Friday, April 8, 2011

Poem in Hindi - आरम्भ है प्रचण्ड


आरम्भ है प्रचण्ड
बोले मस्तकों के झुण्ड
आज जंग की घड़ी की तुम गुहार दो) 2
आन बान शान या कि जान का हो दान
आज इक धनुष के बाण पे उतार दो) 2
आरम्भ है प्रचण्ड
(मन करे सो प्राण दे
जो मन करे सो प्राण ले
वही तो एक सर्वशक्तिमान है) 2
कृष्ण की पुकार है
ये भागवत का सार है
कि युद्ध ही तो वीर का प्रमाण है
कौरवों की भीड़ हो
या पांडवों का नीड़ हो
जो लड़ सका है वो ही तो महान है
जीत की हवस नहीं
किसी पे कोई वश नहीं
क्या ज़िंदगी है ठोकरों पे मार दो
मौत अन्त है नहीं
तो मौत से भी क्यूँ डरें
ये जाके आसमान में दहाड़ दो
आरम्भ है प्रचण्ड ...
(हो दया का भाव
या कि शौर्य का चुनाव
या कि हार का हो घाव
तुम ये सोच लो) 2
या कि पूरे भाल पर
जला रहे विजय का
लाल लाल ये गुलाल
तुम ये सोच लो
रंग केसरी हो या
मृदंग केसरी हो या
कि केसरी हो ताल
तुम ये सोच लो

जिस कवि की कल्पना में
ज़िंदगी हो प्रेम-गीत
उस कवि को आज तुम नकार दो
भीगती मसों में आज
फूलती रगों में आज
आग की लपट का तुम बघार दो
 (आरम्भ है प्रचण्ड
बोले मस्तकों के झुण्ड
आज जंग की घड़ी की तुम गुहार दो) 2
आन बान शान या कि जान का हो दान
आज इक धनुष के बाण पे उतार दो) 2
आरम्भ है प्रचण्ड

Saturday, April 2, 2011

એક વાર ડોક્ટર પાસે એક દરદી ગયો . .........

એક વાર ડોક્ટર પાસે એક દરદી ગયો .
દર્દી : મારે મારી બરાબર સારવાર કરાવવી છે
 ..
ડોક્ટર: તમારે સામેના ડોક્ટર પાસે જવું જોઇએ . હું તો પશુઓનો ડોક્ટર છું
 .
દર્દી : ના હું તમારી પાસે આવ્યો છું , તે બરાબર છે
 .
ડોક્ટર: અરે , ભાઇ તમે તો માણસ જેવા લાગો છો . છતાં કેમ આમ બોલો છો
 ?
દર્દી : હું કુતરાની જેમ આખી રાત મારા કામના ઢસરડાને યાદ કરીને જાગુંછું
 .
ઘોડાની જેમ સવારે વહેલો ઉઠી જાઉં છું
 ..
હરણની જેમ જોબ પર જવા દોડું છું
 .
આખો દીવસ ગધેડાની જેમ કામ કરું છું
 .
વરસના બારે મહીના ઘાંચીના બળદની જેમ ગોળ ગોળ ફર્યા કરું છું
 .
મારા બોસની આગળ પુંછડી પટપટાવું છું
 .
મારા બાળકોની સામે વાંદરાની જેમ નાચું છું
 .
મારી બૈરી આગળ સસલા જેવો નરમ ઘેંશ થઇ જાઉં છું
 .
ડોક્ટર: અરે ! પહેલેથી કહેવું જોઇએને તમે અમેરીકાથી આવો છો.....