आरम्भ है प्रचण्ड
बोले मस्तकों के झुण्ड
आज जंग की घड़ी की तुम गुहार दो) 2
आन बान शान या कि जान का हो दान
आज इक धनुष के बाण पे उतार दो) 2
आरम्भ है प्रचण्ड
बोले मस्तकों के झुण्ड
आज जंग की घड़ी की तुम गुहार दो) 2
आन बान शान या कि जान का हो दान
आज इक धनुष के बाण पे उतार दो) 2
आरम्भ है प्रचण्ड
(मन करे सो प्राण दे
जो मन करे सो प्राण ले
वही तो एक सर्वशक्तिमान है) 2
कृष्ण की पुकार है
ये भागवत का सार है
कि युद्ध ही तो वीर का प्रमाण है
कौरवों की भीड़ हो
या पांडवों का नीड़ हो
जो लड़ सका है वो ही तो महान हैजीत की हवस नहीं
किसी पे कोई वश नहीं
क्या ज़िंदगी है ठोकरों पे मार दो
मौत अन्त है नहीं
तो मौत से भी क्यूँ डरें
ये जाके आसमान में दहाड़ दो
जो मन करे सो प्राण ले
वही तो एक सर्वशक्तिमान है) 2
कृष्ण की पुकार है
ये भागवत का सार है
कि युद्ध ही तो वीर का प्रमाण है
कौरवों की भीड़ हो
या पांडवों का नीड़ हो
जो लड़ सका है वो ही तो महान हैजीत की हवस नहीं
किसी पे कोई वश नहीं
क्या ज़िंदगी है ठोकरों पे मार दो
मौत अन्त है नहीं
तो मौत से भी क्यूँ डरें
ये जाके आसमान में दहाड़ दो
आरम्भ है प्रचण्ड ...
(हो दया का भाव
या कि शौर्य का चुनाव
या कि हार का हो घाव
तुम ये सोच लो) 2
या कि पूरे भाल पर
जला रहे विजय का
लाल लाल ये गुलाल
तुम ये सोच लो
रंग केसरी हो या
मृदंग केसरी हो या
कि केसरी हो ताल
तुम ये सोच लो
जिस कवि की कल्पना में
ज़िंदगी हो प्रेम-गीत
उस कवि को आज तुम नकार दो
भीगती मसों में आज
फूलती रगों में आज
आग की लपट का तुम बघार दो
या कि शौर्य का चुनाव
या कि हार का हो घाव
तुम ये सोच लो) 2
या कि पूरे भाल पर
जला रहे विजय का
लाल लाल ये गुलाल
तुम ये सोच लो
रंग केसरी हो या
मृदंग केसरी हो या
कि केसरी हो ताल
तुम ये सोच लो
जिस कवि की कल्पना में
ज़िंदगी हो प्रेम-गीत
उस कवि को आज तुम नकार दो
भीगती मसों में आज
फूलती रगों में आज
आग की लपट का तुम बघार दो
(आरम्भ है प्रचण्ड
बोले मस्तकों के झुण्ड
आज जंग की घड़ी की तुम गुहार दो) 2आन बान शान या कि जान का हो दान
आज इक धनुष के बाण पे उतार दो) 2
आरम्भ है प्रचण्ड
बोले मस्तकों के झुण्ड
आज जंग की घड़ी की तुम गुहार दो) 2आन बान शान या कि जान का हो दान
आज इक धनुष के बाण पे उतार दो) 2
आरम्भ है प्रचण्ड
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