He asked his third wife.She said "Life is so good over here. I'm going to remarry when you die".
Sunday, December 7, 2014
Story of four wives
He asked his third wife.She said "Life is so good over here. I'm going to remarry when you die".
Friday, December 5, 2014
Success Stories
Wednesday, December 3, 2014
Relations
मैं ये भी समझ गया था कि अब कल अगर आए तो कल का भी पूरा दिन निकल ही जाएगा, क्योंकि दलाल हर खिड़की को घेर कर खड़े रहते हैं, और आम आदमी वहां तक पहुंचने में बिलबिला उठता है।
मैंने उसे रोका। कहा कि रुको एक और कोशिश करता हूं।
उसने अनमने से कहा कि हां, रोज घर से लाता हूं।
वो पता नहीं क्या समझा और कहने लगा कि हां मैं तो एक से एक बड़े अधिकारियों से मिलता हूं।
मैं चुपचाप उसे सुनता रहा।
मैंने एक रोटी उसकी प्लेट से उठा ली, और सब्जी के साथ खाने लगा।
वो चुप रहा।
वो खाना छोड़ कर मेरी बातें सुनने लगा था।
मैंने कहा कि पैसे तो बहुत कमा लोगे, लेकिन रिश्ते नहीं कमाए तो सब बेकार है। क्या करोगे पैसों का? अपना व्यवहार ठीक नहीं रखोगे तो तुम्हारे घर वाले भी तुमसे दुखी रहेंगे। यार दोस्त तो नहीं हैं,
Saturday, November 22, 2014
The RACE
Tuesday, November 18, 2014
story
Monday, November 10, 2014
Management
डॉक्टर ने घोड़े का अच्छे से मुआयना किया और बोल: "आपके घोड़े को काफी गंभीर बीमारी है। हम तीन दिन तक इसे दवाई देकर देखते हैं, अगर यह ठीक हो गया तो ठीक नहीं तो हमें इसे मारना होगा। क्योंकि यह बीमारी दूसरे जानवरों में भी फ़ैल सकती है।"
दूसरे दिन डॉक्टर फिर आया और दवाई देकर चला गया।
इतने में किसान वापस आया तो उसने देखा कि उसका घोडाभाग रहा है।
Monday, November 3, 2014
Being human
बहुत साल बाद दो दोस्त रास्ते में मिले .
: खवाहिश नही मुझे
मशहुर होने की।
आप मुझे पहचानते हो
बस इतना ही काफी है।
बुरे ने बुरा जाना मुझे।
क्यों की जीसकी जीतनी
जरुरत थी उसने उतना ही
पहचाना मुझे।
भी कितना अजीब है,
शामें कटती नहीं, और साल
गुज़रते चले जा रहे हैं....!
दौड़ है ये ज़िन्दगी,
जीत जाओ तो कई
अपने पीछे छूट जाते हैं,
और हार जाओ तो अपने
ही पीछे छोड़ जाते हैं।.....
Being human
Saturday, November 1, 2014
Thursday, October 30, 2014
Earn relations
उन दिनों इंटरनेट पर फार्म भरने की सुविधा नहीं थी। पासपोर्ट दफ्तर में दलालों का बोलबाला था और खुलेआम दलाल पैसे लेकर पासपोर्ट के फार्म बेचने से लेकर उसे भरवाने, जमा करवाने और पासपोर्ट बनवाने का काम करते थे।
मैं ये भी समझ गया था कि अब कल अगर आए तो कल का भी पूरा दिन निकल ही जाएगा, क्योंकि दलाल हर खिड़की को घेर कर खड़े रहते हैं, और आम आदमी वहां तक पहुंचने में बिलबिला उठता है।
मैंने उसे रोका। कहा कि रुको एक और कोशिश करता हूं।
उसने अनमने से कहा कि हां, रोज घर से लाता हूं।
वो पता नहीं क्या समझा और कहने लगा कि हां मैं तो एक से एक बड़े अधिकारियों से मिलता हूं।
मैं चुपचाप उसे सुनता रहा।
मैंने एक रोटी उसकी प्लेट से उठा ली, और सब्जी के साथ खाने लगा।
वो चुप रहा।
वो खाना छोड़ कर मेरी बातें सुनने लगा था।
मैंने कहा कि पैसे तो बहुत कमा लोगे, लेकिन रिश्ते नहीं कमाए तो सब बेकार है। क्या करोगे पैसों का? अपना व्यवहार ठीक नहीं रखोगे तो तुम्हारे घर वाले भी तुमसे दुखी रहेंगे। यार दोस्त तो नहीं हैं,
Wednesday, October 29, 2014
Cup of tea
आज जीवन का एक महत्वपूर्ण पाठ पढाने वाले हैं ...
टेबल टेनिस की गेंदें डालने लगे और तब तक डालते रहे जब तक कि उसमें एक भी गेंद समाने की जगह नहीं बची ...
उन्होंने छात्रों से पूछा - क्या बरनी पूरी भर गई ? हाँ ...
आवाज आई ...
फ़िर प्रोफ़ेसर साहब ने छोटे - छोटे कंकर उसमें भरने शुरु किये h धीरे - धीरे बरनी को हिलाया तो काफ़ी सारे कंकर उसमें जहाँ जगह खाली थी , समा गये ,
फ़िर से प्रोफ़ेसर साहब ने पूछा , क्या अब बरनी भर गई है , छात्रों ने एक बार फ़िर हाँ ... कहा
अब प्रोफ़ेसर साहब ने रेत की थैली से हौले - हौले उस बरनी में रेत डालना शुरु किया , वह रेत भी उस जार में जहाँ संभव था बैठ गई , अब छात्र अपनी नादानी पर हँसे ...
फ़िर प्रोफ़ेसर साहब ने पूछा , क्यों अब तो यह बरनी पूरी भर गई ना ? हाँ
.. अब तो पूरी भर गई है .. सभी ने एक स्वर में कहा ..
चाय के दो कप निकालकर उसमें की चाय जार में डाली , चाय भी रेत के बीच स्थित
थोडी़ सी जगह में सोख ली गई ...
कंकर भर दिये होते तो गेंदें नहीं भर पाते , रेत जरूर आ सकती थी ...
ठीक यही बात जीवन पर लागू होती है ...
और अपनी ऊर्जा उसमें नष्ट करोगे तो तुम्हारे पास मुख्य बातों के लिये अधिक समय
नहीं रहेगा ...
बच्चों के साथ खेलो , बगीचे में पानी डालो , सुबह पत्नी के साथ घूमने निकल जाओ ,
घर के बेकार सामान को बाहर निकाल फ़ेंको , मेडिकल चेक - अप करवाओ ...
टेबल टेनिस गेंदों की फ़िक्र पहले करो , वही महत्वपूर्ण है ... पहले तय करो कि क्या जरूरी है
... बाकी सब तो रेत है ..
छात्र बडे़ ध्यान से सुन रहे थे ..
कि " चाय के दो कप " क्या हैं ?
इसका उत्तर यह है कि , जीवन हमें कितना ही परिपूर्ण और संतुष्ट लगे , लेकिन
अपने खास मित्र के साथ दो कप चाय पीने की जगह हमेशा होनी चाहिये ।
Tuesday, October 28, 2014
Happy thoughts
एक गुंडा शेविंग और
हेयर कटिंग कराने के लिये
सैलून में गया.
नाई से बोला -”अगर मेरी
शेविंग ठीक से से बिना कटे
छंटे की तो मुहमाँगा दाम दूँगा !
अगर कहीं भी कट गया तो
गर्दन उड़ा दूंगा !”
नाई ने डर के मारे मना कर दिया.
गुंडा शहर के दूसरे नाइयों के पास गया और वही बात कही.
लेकिन सभी नाईयो ने डर के
मारे मना कर दिया.
अंत में वो गुंडा एक गाँव के
नाई के पास पहुँचा.
वह काफी कम उम्र का लड़का था.
उसने कहा – “ठीक है,
बैठो मैं बनाता हूँ”.
उस लड़के ने काफी बढ़िया
तरीके से गुंडे की शेविंग
और हेयर कटिंग कर दी.
गुंडे ने खुश होकर लड़के
को दस हजार रूपये दिए.
और पूछा – “तुझे अपनी
जान जाने का डर नहीं था क्या ?”
लड़के ने कहा – “डर ? डर
कैसा...?
पहल तो मेरे हाथ में थी…”.
गुंडे ने कहा – “‘पहल तुम्हारे
हाथ में थी’ .. मैं मतलब नहीँ
समझा ?”
लड़के ने हँसते हुये कहा –:
“भाईसाहब,
उस्तरा तो मेरे
हाथ में था…
अगर आपको खरोंच भी
लगती तो आपकी गर्दन
तुरंत काट देता !!!”
बेचारा गुंडा ! यह जवाब
सुनकर पसीने से लथपथ हो
गया।
Moral : जिन्दगी के हर मोड
पर खतरो से खेलना पडता है
नही खेलोगे तो कुछ नही कर
पाओगे
यानि
डर के आगे ही जीत है...
बेच सको तो बेच के दीखाओ
अपने अहंकार (Ego) को
OLX पर.,
एक रुपीया भी नहीं मीलेगा !!
तभी पता चलेगा की
क्या फालतु चीज पकड रखी थी अब तक...!
😊..Happy thoughts..😊
Sunday, October 26, 2014
Our thoughts makes our future !
एक आदमी ने देखा की एक गरीब बच्चा उसकी कीमती कार को निहार रहा है। उसे रहम आ गया और उसने उस बच्चे को अपनी कार में बैठा लिया।
बच्चा : आपकी कार बहुत महंगी है ना।
आदमी : हाँ। मेरे बड़े भाई ने मुझे उपहार में दी है।
बच्चा : आपके बड़े भाई कितने अच्छे आदमी हैं।
आदमी: मुझे पता है तुम क्या सोच रहे हो। तुम भी ऐसी कार चाहते हो ना?
बच्चा: नहीं। मै भी आपके बड़े भाई जैसा बनना चाहता हूँ। मेरे भी छोटे भाई बहन हैं ना।
"अपनी सोच को हमेशा ऊंचा रखें, दूसरों की अपेक्षाओं से भी
Wednesday, October 22, 2014
શુભ દિપાવલી
આ વખતે તો સ્વયં પ્રગટીએ ચલો દીવાની જેમ.
ઝટપટ ફોડી દઈને,
ચહેરા ઉપર ફૂલઝડી સમ
ઝરતું સ્મિત લઈને;
કોઈ પણ કારણ વિના જ કરીએ એકમેકને પ્રેમ…
આ વખતે તો સ્વયં પ્રગટીએ ચલો દીવાની જેમ.
એક ચમકતો હીરો,
ચલો શોધીએ ભીતર જઈને
ખુદની તેજ-લકીરો;
ભીતર ભર્યું જ છે અજવાળું ના ઝળહળીએ કેમ?
આ વખતે તો સ્વયં પ્રગટીએ ચલો દીવાની જેમ.
